Rahul Gandhi: वोटर रजिस्ट्रेशन से जुड़े ऑनलाइन फॉर्म 6 को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच विवाद फिर गहरा गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार, 1 अक्टूबर को फॉर्म में किए गए बदलाव को लेकर चुनाव आयोग से कई सवाल पूछे। उन्होंने जानना चाहा कि बदलाव का निर्देश किसने दिया और इसे लागू करने के लिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में किस अधिकारी ने मंजूरी दी। TCS में इसे मंजूरी देने वाला अधिकारी कौन था? राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि ऑनलाइन फॉर्म 6 में कथित तौर पर बदलाव किया गया और सवाल उठाया कि चुनाव आयोग के भीतर से TCS को यह परिवर्तन करने का निर्देश किसने दिया। उन्होंने यह भी पूछा कि TCS में इसे मंजूरी देने वाला अधिकारी कौन था और क्या कंपनी पर ऐसा करने का कोई दबाव था। https://twitter.com/RahulGandhi/status/2105505948735554013 क्या है फॉर्म 6 का विवाद? फॉर्म 6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए किया जाता है। विवाद उस समय शुरू हुआ जब विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़ी एक अतिरिक्त घोषणा को इसके ऑनलाइन संस्करण के साथ जोड़ा गया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस अतिरिक्त घोषणा में आवेदक से यह जानकारी मांगी गई थी कि उसका या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछली गहन पुनरीक्षण वाली मतदाता सूची में दर्ज था या नहीं। इसी अतिरिक्त आवश्यकता को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी आपत्तियां सामने आने की रिपोर्ट है। दो चुनाव आयुक्तों ने जताई थी आपत्ति रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने फॉर्म 6 के साथ अतिरिक्त घोषणा जोड़े जाने पर आपत्ति दर्ज की थी। इस बीच चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि मूल वैधानिक फॉर्म 6 में संशोधन नहीं किया गया था, बल्कि SIR की प्रक्रिया के दौरान उससे जुड़ा एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र इस्तेमाल किया गया था। आयोग ने 26 सितंबर की बैठक के बाद कहा था कि गैर-SIR अवधि में Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म ही इस्तेमाल किए जाएंगे। अब क्या हुआ? SIR पूरा हो चुके राज्यों में चुनाव आयोग ने ऑनलाइन फॉर्म 6 से अतिरिक्त घोषणा को हटा दिया है। हालांकि जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया अभी चल रही है, वहां यह घोषणा अभी उपलब्ध है। यानी विवादित अतिरिक्त प्रक्रिया को सभी जगह स्थायी बदलाव के तौर पर लागू नहीं रखा गया है। चुनाव आयोग ने ECINET प्रणाली की कार्यप्रणाली की समीक्षा के लिए भी कदम उठाए हैं। ऐसे में अब बड़ा सवाल यही है कि फॉर्म 6 में अतिरिक्त घोषणा किस प्रक्रिया के तहत जोड़ी गई, इसकी मंजूरी किस स्तर पर हुई और इसे लेकर सामने आई आपत्तियों का पूरा रिकॉर्ड क्या कहता है। राहुल गांधी के सवालों के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। हालांकि बदलाव को लेकर कांग्रेस के आरोप और चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण अलग-अलग दावे पेश करते हैं। पूरे मामले की तस्वीर संबंधित रिकॉर्ड और आयोग की आगे की कार्रवाई से और स्पष्ट हो सकती है। ये भी पढ़ें: 2 अक्टूबर से मार्च, 6 को EC दफ्तर तक पहुंचेंगे विपक्षी सांसद! चुनाव आयोग के खिलाफ INDIA गठबंधन का बड़ा प्लान